ZINDAGI

खवाहिश नही,
मुझे मशहुर होने की ।
आप मुझे पहचानते हो,
बस इतना ही काफी है ।

अच्छे ने अच्छा और,
बुरे ने बुरा जाना मुझे ।
जिस्की जितनी जरुरत थी,
उसने उतना ही पहचाना मुझे ।

ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा भी,
कितना अजीब है,
शामें कटती नहीं,
और साल गुज़रते चले जाते है

एक अजीब सी दौड़ है,
ये ज़िन्दगी, जीत जाओ तो,
कई अपने पीछे छूट जाते हैं,
और हार जाओ तो,
अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दूर

  जहा से चला था आज वही खड़ा हूँ  अंजानो से पता पूछता हुआ निकला हूँ  अपनों के सपनो में दबा हुआ  हकीकत से दूर भागता रहा हूँ सच को जेब में दबा क...

लोकप्रिय पोस्ट