इंतिजार

          ------  KAithAl  ------
ये इंतिजार भी बड़ी अजीब चीज है
कैथल, आँखों से नींद ही चुरा लेती है ।
रात यू ही कट जाती है करवटो में,
कुछ तो बात जरुर होगी ।

कभी तो नींद आयेगी शायद, तब इंतिजार खत्म हो ।
कुछ आस अभी भी बाकी है, शायद उन्हें जी पाऊ ।
रात का एक पेहेर तो कटता नहीं ।
ना जाने जिन्दगी कैसे कटेगी ?

घर का वो आइना, आज भी तेरी राह तकता है ।
धुन्दला गया है अब वो भी, इंतिजार में ।
ये इंतिजार भी बड़ी अजीब चीज है ।

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