एक आखिरी तम्मना

      ------  KAithAl  ------
   >>एक आखिरी तम्मना<<
एक आखिरी तम्मना आखिरी ही रहेगी ।
साथ रहने की चाहत हमेशा बाकी ही रहेगी ।
चाहे गर्मी के दिन हो या शर्दी की राते ।
हमारी बात बाकी थी और बाकी ही रहेगी ।
कुछ अश्क तेरे दामन है कुछ मेरे,
उन्हें सुखाना तो पड़ेगा ।
कुछ राज है तेरे मेरे दर्मिया,
उन्हें छुपना तो पड़ेगा ।
अपने चेहरे में लगे आसुओ को पोछ लो ,
कही कोई देख ना ले ।
अपने अश्क खुद में ही समेट लो ,
कही कोई देख ना ले ।
यू ऐसे तो सब कुछ खत्म न होना था ।
कुछ आख़िरी लब्ज तुझे कहना था, कुछ मुझे।
इतने पल जो हमने बिताये थे उनका हिसाब भी देना था।
जाते जाते तो हम एक बार मिल पाते।
जो आखिरी अश्क थे तुझे वो भी तो देने थे ।
जाते जाते दो लफ्ज भी तो कहने थे ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दूर

  जहा से चला था आज वही खड़ा हूँ  अंजानो से पता पूछता हुआ निकला हूँ  अपनों के सपनो में दबा हुआ  हकीकत से दूर भागता रहा हूँ सच को जेब में दबा क...

लोकप्रिय पोस्ट