------ KAithAl ------
>>एक आखिरी तम्मना<<
एक आखिरी तम्मना आखिरी ही रहेगी ।
साथ रहने की चाहत हमेशा बाकी ही रहेगी ।
चाहे गर्मी के दिन हो या शर्दी की राते ।
हमारी बात बाकी थी और बाकी ही रहेगी ।
कुछ अश्क तेरे दामन है कुछ मेरे,
उन्हें सुखाना तो पड़ेगा ।
कुछ राज है तेरे मेरे दर्मिया,
उन्हें छुपना तो पड़ेगा ।
अपने चेहरे में लगे आसुओ को पोछ लो ,
कही कोई देख ना ले ।
अपने अश्क खुद में ही समेट लो ,
कही कोई देख ना ले ।
यू ऐसे तो सब कुछ खत्म न होना था ।
कुछ आख़िरी लब्ज तुझे कहना था, कुछ मुझे।
इतने पल जो हमने बिताये थे उनका हिसाब भी देना था।
जाते जाते तो हम एक बार मिल पाते।
जो आखिरी अश्क थे तुझे वो भी तो देने थे ।
जाते जाते दो लफ्ज भी तो कहने थे ।
एक आखिरी तम्मना
LAst poem
------ KAithAl ------
एक छोटा सा सफ़र था हमारा
जाने कब कट गया
पता ही ना चला
कुछ मिठास समेटे हुए
कुछ तेरी बात समेटे हुए
कुछ उम्मीद कुछ आस
कुछ दर्द कुछ प्यार समेटे हुए
जाने कब कट गया पता ही ना चला
जाने कब कट गया
पता ही ना चला
कुछ मिठास समेटे हुए
कुछ तेरी बात समेटे हुए
कुछ उम्मीद कुछ आस
कुछ दर्द कुछ प्यार समेटे हुए
जाने कब कट गया पता ही ना चला
हे दुआ अब कि आगे का सफ़र भी
हो तेरा खुशियो से भरा
हर याद हर प्यार एहसास समेटे हुए
हो तब्जो सबसे पहले तेरी तेरे नए नए जीवन में हर दम
मिले हर उम्मीद हर खुशी हर कदम
तेरी मुस्कराहट सी हो तेरी जिन्दगी हर पल
रहे तू हर दम खुश हर याद हर ख़ुशी समेटे हुए
कुछ मिठास समेटे हुए
कुछ तेरी अपनी ही सी बात समेटे हुए
हो तेरा खुशियो से भरा
हर याद हर प्यार एहसास समेटे हुए
हो तब्जो सबसे पहले तेरी तेरे नए नए जीवन में हर दम
मिले हर उम्मीद हर खुशी हर कदम
तेरी मुस्कराहट सी हो तेरी जिन्दगी हर पल
रहे तू हर दम खुश हर याद हर ख़ुशी समेटे हुए
कुछ मिठास समेटे हुए
कुछ तेरी अपनी ही सी बात समेटे हुए
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