खामोश सा


    ------  KAithAl  ------
अपना भी अफसाना हुआ करता था।
खामोश सा ही सही।
तेरे पास हुआ करता था खामोश सा ही सही।
कुछ यादे उन यादो में है जो तेरे साथ है ,खामोश सी।
राज जो तूने तकिये के नीचे छुपाये थे।
कुछ बाते जो तूने उस रात बताई थी।
खामोश थी, पर थी तो सही।
कुछ अश्क बहाए थे हमने।
ना तुझे पता चला ना मुझे, इतने खामोश थे वो पल। खामोश ही सही जब तेरे पास थे, खामोश थे।
ख्वाबो के दर्मिया भी नहीं आते है पल।
भूल के भी नहीं बुलाते है वो नदिया के कल कल।
दर्द का अफसाना अब अपना न रहा।
याद आती है तेरी पर खमोश सी।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दूर

  जहा से चला था आज वही खड़ा हूँ  अंजानो से पता पूछता हुआ निकला हूँ  अपनों के सपनो में दबा हुआ  हकीकत से दूर भागता रहा हूँ सच को जेब में दबा क...

लोकप्रिय पोस्ट