दूर

 


जहा से चला था आज वही खड़ा हूँ 

अंजानो से पता पूछता हुआ निकला हूँ 

अपनों के सपनो में दबा हुआ 

हकीकत से दूर भागता रहा हूँ

सच को जेब में दबा के  

झूठ की कस्ती बना के बढ़ चला हूँ   

सफर लम्बा रहा सब हुआ हासिल मगर 

ख्वाबो से दूर अपनों से दूर हूँ

जहा से चला था वही खड़ा हुआ हूँ मैं 

रे-बन

 क्यों है खफा इतनी वफ़ा के बाद !

सोचता हूँ मैं तेरी सर्द आँखों के  नीचे बैठ कर !!


जिन आँखों में चमक थी खुशिओं की !

बरबाद हो गए है रे-बन उस नमी के बाद !!


क्या बताऊ कितना संभाला है खुद को !

पर संभल नहीं पाया हूँ उस फिसलन के बाद !!


कोशिश तो बहुत की थी, कि भुला दे तुझे !

लेकिन भूल नहीं पाया हूँ मैं , तेरे  जाने  के  बाद !!

ZINDAGI

खवाहिश नही,
मुझे मशहुर होने की ।
आप मुझे पहचानते हो,
बस इतना ही काफी है ।

अच्छे ने अच्छा और,
बुरे ने बुरा जाना मुझे ।
जिस्की जितनी जरुरत थी,
उसने उतना ही पहचाना मुझे ।

ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा भी,
कितना अजीब है,
शामें कटती नहीं,
और साल गुज़रते चले जाते है

एक अजीब सी दौड़ है,
ये ज़िन्दगी, जीत जाओ तो,
कई अपने पीछे छूट जाते हैं,
और हार जाओ तो,
अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं ।

NOBoDY

वो हर पल है

वो लम्हातो जस्बातो यादो में है
सिमट के रह गए अल्फाजो में है

शिसकती सी सांसो में है
बेचैन से वादों में है

करवट लेती अंगड़ाई में है
आहें भरते एहसासों में है

दरवाजे दस्तको में है
दरकत दर दरकत पड़े अश्को में है

प्यासी चीखों में है
रुवासी आँखों में है

तन्हा लम्हो में है
उड़ते पतंगों में है

कूचे के कोनो में है
गलियों की मीनारो में है

हर जगह हर फलक हर घडी
मेरे पास मेरे साथ मेरे हर फकत में है

मतवारी

------  KAithAl  ------
मीरा अपने प्रभु की दीवानी
और मैं मीरा के प्रेम में खो गया
प्रभु के संग में गाती
प्रभु के साथ खो गयी
और मैं मीरा के प्रेम में खो गया
नाचे बनके मतवारी
जैसे किया हो कोई मदपान
और उसके मद मद में
मैं भी मतवारा हो गया
मीरा तो अपने प्रभु की दीवानी
और मैं मीरा के प्रेम में खो गया
अपने प्रेम का घर बनाके
प्रभु को कर लिया कैद रे
और मीरा के प्रेम में
मैं भी अपराधी हो गया
मीरा तो प्रेम दीवानी
और मैं उसके प्रेम में खो गया

अश्क

---------KAITHAL--------
झंझोर लिया है मुझे,
तेरी याद ने।
अश्क बाकि ना अब।
रातो में, फिर भी ना जाने कहा से।
चले आते है, बिन बुलाये।
बेचेन, उदास, बेसब्र से।
खीच ले जाते है, मुझे।
तेरी यादो की, उस देहलीज पे।
बेसब्र से, उलझे हुए तेरी यादो में।
ये अश्क।
एक बिकराल सी खामोसी में।
डूब जाते है, तेरी यादो में।
बुदबुदाते हुए तेरा नाम।
चीखते हुए,
झंझोरते हुए,
टीसते हुए, खुद को।
मिट जाते है, ये अश्क।
तेरी यादो की उन यादो में।
तेरी याद, तेरे नाम में

मालतिया

ऎ मालतिया
जब तू है बेठी अपने घरोंदे मा
फुर्सत के पलन मे
पलकों को मूदे
यादो में खोई
तब तेरी उन यादन मा हम होवे है का

ऎ मालतिया
जब बारिश आवे है
फाग उड़े है
छलनी में दीप जले है
रेडिओ पे कही गीत बजे है
तब तोरे उन गीतन मा हम होवे है का

ऎ मालतिया
जब शाम ढले और रात आवे है
पीछे से जब कोई थपकी दे जावे है
जब कोई बार बार तोखा फ़ोन लगावे है
और जब तू डर के रोवे है
तब तोरे आंसू पोछे खातिर हम हुआ होवे है का

ऐ मलतिया
जब तू बीमार होत है
गुस्से में लाल होत है
मुह फुला के बैठ जात है
और जब तू चाटा मारत है
तब तोर ऊ चाटा खाए खातिर हम हुवा होत है का

ऐ मालतिया
जब हम खुश होत है
तोसे अपने दिल की बात कहत है
तोखा सब कुछ बतावत है
तोखा सुनावत है
और जब तू हमसे कुछ कहत है
तब तोर उन बातन का सुने खातिर हम हुवा होत है का

ऎ मालतिया
जब हम रात में अकेले रहत है
तू हमार साथ रहत है
हम बात करत है
हमका बाहन में समात है
हमार बालन मा उंगली फिरावर है
और जब तू अकेलीे रहत है
तब हम भी तोरे अकेले पन मा तोरे साथ होवे है का

ऎ मालतिया
और जब तोरी याद में
तोरी खातिर हम लिखत है
तो इ सब तू हमार खातिर पढ़त है का
ऎ मालतिया

नैन

एक तेरे नैन से मालतिया, जबसे मिले है मेरे नैन।
भूला कैथल ये जग सारा, बस तेरे नैन में है मेरे नैन।

भव सागर

मैं तो तेरे प्यार में मालतिया, भूल गया जग सारा।
कहे का भव सागर कैथल, कहे का सहारा जिसे तू लगाये किनारा।

सहारा

तेरे प्यार में होक पागल, फिरता हूँ मैं मतवाला।
कैथल जैसे उड़े पाके तिनका, तूफा का सहारा।

मालतिया फाग

तेरा फाग ऐसा चढ़ा, चढ़े ना दूजा कोये।
कोन से रंग से रंग दिया तूने ये मालतिया, जो प्रीत से भी गाढ़ा होये।

सीख

             ------- kAithAl -------

जिंदगी के चंद पलो में ही हम बहुत कुछ सीख गए
छोटी सी उम्र में ही हम बहुत कुछ सीख गए
फ़िक्र तो ये है, कि छुपाने और बताने को अब कुछ ना रहा
इतने से ही पालो में हम बहुत कुछ सीख गए
छोटी सी उम्र में ही हम बहुत कुछ सीख गए

यादे तसब्बुर में कितने राज छुपाये है हमने
वक़्त के साथ अब हम उन्हें छुपाना भी सीख गए

दिन ढले शाम तले कुछ बाते याद आती है
अब उन बातो को नज़र अंदाज करना भी हम सीख गए

सिखाया वक़्त ने या हम खुद ही सीख गए
जिंदगी के चंद पलो में ही हम बहुत कुछ सीख गए
छोटी सी उम्र में ही हम बहुत कुछ सीख गए
वक़्त के साथ अब हम अपने अशुओ को छुपाना भी सीख गए
छोटी सी उम्र में ही हम बहुत कुछ सीख गए

इंतिजार

          ------  KAithAl  ------
ये इंतिजार भी बड़ी अजीब चीज है
कैथल, आँखों से नींद ही चुरा लेती है ।
रात यू ही कट जाती है करवटो में,
कुछ तो बात जरुर होगी ।

कभी तो नींद आयेगी शायद, तब इंतिजार खत्म हो ।
कुछ आस अभी भी बाकी है, शायद उन्हें जी पाऊ ।
रात का एक पेहेर तो कटता नहीं ।
ना जाने जिन्दगी कैसे कटेगी ?

घर का वो आइना, आज भी तेरी राह तकता है ।
धुन्दला गया है अब वो भी, इंतिजार में ।
ये इंतिजार भी बड़ी अजीब चीज है ।

दूर

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